एवियन। फ्रांस में आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच करीब 16 महीने बाद पहली आमने-सामने की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की। हालांकि, इस दौरान हुई चर्चा का आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि इस मुलाकात ने बुधवार को होने वाली औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता की पृष्ठभूमि तैयार कर दी है।
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते, शुल्क संबंधी मुद्दों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न हालात और भारतीय वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दोनों देशों के बीच चर्चा के प्रमुख विषय हो सकते हैं।
हाल के महीनों में व्यापारिक शुल्कों और कुछ बयानों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में तल्खी देखने को मिली थी। इसी क्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत का दौरा कर संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की थी। वहीं, पिछले सप्ताह ओमान के तट के पास एक व्यापारिक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात के बीच भारत अपनी रणनीतिक और आर्थिक चिंताओं को अमेरिका के समक्ष मजबूती से रख सकता है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच प्रस्तावित औपचारिक वार्ता पर वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं।
जी7 शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा जैसे विषयों पर केंद्रित है। हालांकि, इस मंच पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात ने विशेष ध्यान आकर्षित किया है। इसे भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
@MUSKAN KUMARI
