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शिक्षक के बेटे से सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार के प्रमुख विधि प्रतिनिधि तक, एस. डी. संजय की प्रेरणादायक यात्रा

पटना। साधारण परिवार में जन्मे वरिष्ठ अधिवक्ता एस. डी. संजय ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और विधि क्षेत्र में लंबे अनुभव के बल पर देश के प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों में विशेष पहचान बनाई है। एक शिक्षक के पुत्र के रूप में जीवन की शुरुआत करने वाले एस. डी. संजय वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (Additional Solicitor General of India) के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सर गणेश दत्त पाटलिपुत्र हाई स्कूल से पूरी की और पटना विश्वविद्यालय के वाणिज्य महाविद्यालय से वाणिज्य में ऑनर्स की डिग्री प्रथम श्रेणी और लेखांकन विषय में विशिष्ट योग्यता के साथ प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी (ऑनर्स) की पढ़ाई की और वकालत की शुरुआत की। कुछ समय बाद वे पटना लौट आए और पटना हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की।

वर्ष 1989 में उन्होंने अपने स्वतंत्र चैंबर की स्थापना की और संवैधानिक, दीवानी, आपराधिक तथा कराधान कानून के मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। जल्द ही वे पटना हाईकोर्ट के प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में शामिल हो गए और देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों तथा सुप्रीम कोर्ट में कई बड़े कॉरपोरेट घरानों का प्रतिनिधित्व किया।

वर्ष 2010 में उन्हें बिहार सरकार का अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किया गया। 2013 में पटना हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया। वर्ष 2015 में राष्ट्रपति द्वारा उन्हें पटना हाईकोर्ट के लिए भारत सरकार का अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया। इस पद पर उन्होंने जुलाई 2020 तक बिहार और झारखंड में केंद्र सरकार के मुकदमों की जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे। सितंबर 2024 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया। वर्तमान में वे देशभर में विशेष अदालतों की स्थापना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में भारत सरकार का पक्ष रख रहे हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित लापता बच्चों और मानव तस्करी पर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने वाली समिति के संयोजक भी हैं।

कानूनी क्षेत्र के साथ-साथ एस. डी. संजय सामाजिक कार्यों से भी जुड़े हुए हैं। वे दधीचि देहदान समिति के माध्यम से नेत्र, अंग और देहदान के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, भारत विकास विकलांग न्यास से भी जुड़े हैं, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग लोगों के लिए अस्पताल संचालित करता है।

उनकी पत्नी सुशीला अग्रवाल भी अधिवक्ता हैं। उनके पुत्र अक्षत और पुत्रवधू दिशा सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे हैं, जबकि उनकी पुत्री और दामाद अमेरिका के सिलिकॉन वैली में कार्यरत हैं। एस. डी. संजय की सफलता में उनके परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च न्यायालय में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करने तक का उनका सफर युवा वकीलों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

@MUSKAN KUMARI

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