रेप केस में सजा काट रहे को एक बार फिर 30 दिन की पैरोल मिल गई है। मंगलवार को वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आया। वर्ष 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद यह 16वीं बार है जब उसे अस्थायी रिहाई मिली है। पैरोल अवधि के दौरान वह सिरसा स्थित डेरे में रहेगा।
राम रहीम की रिहाई ऐसे समय में हुई है जब कई राज्यों में स्थानीय चुनावों का माहौल बना हुआ है। के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं, जिसके कारण इस फैसले के राजनीतिक असर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
के नेता ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को विशेष राहत दी जा रही है और कानून का इस्तेमाल अलग-अलग तरीके से हो रहा है। उन्होंने पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री से भी सवाल पूछे।
वहीं (SGPC) ने भी इस कदम पर नाराजगी जताई है। एसजीपीसी सदस्य भगवंत सिंह सियालका ने कहा कि गंभीर मामलों में दोषी लोगों को राहत दी जा रही है, जबकि सिख बंदियों की रिहाई की मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
इस पूरे विवाद पर हरियाणा के डीजीपी ने कहा कि पैरोल देने का फैसला जेल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि चुनावी समय में बार-बार मिल रही पैरोल को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राम रहीम के समर्थकों का कई राज्यों में प्रभाव है, ऐसे में उनकी रिहाई का चुनावी राजनीति पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे पर सरकारों को घेर रहे हैं।
@MUSKAN KUMARI
