वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले संघर्ष के बाद युद्ध समाप्ति की दिशा में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार देर रात घोषणा की कि ईरान के साथ जारी जंग अब समाप्ति की ओर है और जल्द ही अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को हटा देगा। इसके साथ ही उन्होंने जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और युद्ध समाप्ति के लिए विस्तृत फ्रेमवर्क तैयार करने की बात कही।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय समझौते पर सहमति बनी है। समझौते में ईरान और लेबनान पर आगे किसी भी प्रकार के सैन्य हमले नहीं करने का प्रावधान शामिल है। इस व्यवस्था में इस्राइल को भी परोक्ष रूप से एक पक्ष के रूप में शामिल किया गया है, हालांकि वह वार्ता का प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं था।
समझौते के तहत लेबनान मोर्चे पर स्थायी युद्धविराम और सभी सैन्य अभियानों को रोकने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा अमेरिकी पक्ष की ओर से दक्षिणी लेबनान से इस्राइली सेना की वापसी का सुझाव भी दिया गया, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि इस्राइल अपनी मौजूदा सैन्य तैनाती बरकरार रखेगा।
समझौते में ईरान ने एक बार फिर परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि इस समझौते से इस्राइल की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है और इससे क्षेत्र में बड़े खतरे को टालने में मदद मिलेगी।
हालांकि, इस्राइल की प्रमुख चिंताओं में शामिल ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और हिजबुल्लाह, हमास तथा हूती जैसे प्रॉक्सी संगठनों को मिलने वाले समर्थन को रोकने संबंधी मुद्दों का मसौदे में स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। यही कारण है कि समझौते को लेकर इस्राइल में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, हालांकि इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष इन शर्तों का किस हद तक पालन करते हैं।
@MUSKAN KUMARI
