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तुर्की से ‘किजिल्मा’ ड्रोन खरीद सकता है पाकिस्तान, भारत के MQ-9 रीपर सौदे के जवाब के रूप में देखा जा रहा कदम

पाकिस्तान जल्द ही तुर्की से अत्याधुनिक बायराकटार किजिल्मा ड्रोन खरीद सकता है। इस संभावना को तब और बल मिला जब पाकिस्तान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर बाबर सिद्धू ने 22 मई को तुर्की का दौरा किया और वहां बायकर टेक्नोलॉजीज की उत्पादन फैसिलिटी का निरीक्षण किया। दौरे के दौरान उन्होंने बायराकटार किजिल्मा ड्रोन के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं, जिसके बाद रक्षा विशेषज्ञों के बीच इस संभावित रक्षा सौदे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बायराकटार किजिल्मा को तुर्की का अगली पीढ़ी का मानव रहित लड़ाकू ड्रोन माना जाता है। यह ड्रोन हाल ही में तब चर्चा में आया था जब उसने एक बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) मिसाइल के जरिए हवाई लक्ष्य को सफलतापूर्वक मार गिराया था। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस ड्रोन को भारत द्वारा अमेरिका से खरीदे जा रहे MQ-9 रीपर ड्रोन के जवाब के रूप में देख रहा है। MQ-9 रीपर को अमेरिका का सबसे ज्यादा युद्ध अभियानों में इस्तेमाल होने वाला ड्रोन माना जाता है।

पाकिस्तान-तुर्की रक्षा सहयोग लगातार मजबूत

पाकिस्तानी वायुसेना पहले से ही तुर्की की बायकर टेक्नोलॉजीज के कई ड्रोन इस्तेमाल कर रही है। इनमें बायराकटार अकिंसी और बायराकटार TB-2 जैसे ड्रोन शामिल हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है।

बायकर टेक्नोलॉजीज ने पाकिस्तान में अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी “बायराकटार टेक्नोलॉजी पाकिस्तान” की स्थापना भी की है। इसके अलावा कंपनी ने अनुसंधान और विकास कार्यों के लिए पाकिस्तान के नेशनल एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क (NASTP) के साथ सहयोग समझौता किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार बायकर पाकिस्तान में एक बड़ी उत्पादन फैसिलिटी भी तैयार कर रही है और स्थानीय स्तर पर इंजीनियरों की भर्ती अभियान चला रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल असेंबली लाइन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में पाकिस्तान और तुर्की मिलकर नए ड्रोन सिस्टम विकसित कर सकते हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है यह विकास?

विश्लेषकों का मानना है कि यदि पाकिस्तान को किजिल्मा जैसे एडवांस कॉम्बैट ड्रोन मिलते हैं तो इससे दक्षिण एशिया में ड्रोन युद्ध क्षमता का संतुलन बदल सकता है। खासकर भारत और पाकिस्तान के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

भारत पहले ही अमेरिका से MQ-9 रीपर ड्रोन खरीदने की दिशा में आगे बढ़ चुका है, जिन्हें समुद्री निगरानी और लंबी दूरी की सटीक स्ट्राइक क्षमताओं के लिए जाना जाता है। ऐसे में पाकिस्तान का तुर्की की ओर झुकाव क्षेत्रीय रक्षा समीकरणों में नया आयाम जोड़ सकता है।

क्या है बायराकटार किजिल्मा ड्रोन की खासियत?

बायराकटार किजिल्मा एक अत्याधुनिक जेट-संचालित कॉम्बैट ड्रोन है, जिसे हवा से हवा में लड़ाई और रणनीतिक हमलों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वायत्त उड़ान क्षमता, उन्नत सेंसर और स्वदेशी डेटा लिंक सिस्टम लगाए गए हैं।

यह ड्रोन जमीन के साथ-साथ विमानवाहक पोतों से भी संचालित किया जा सकता है। किजिल्मा ने गोकडोगन हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल के जरिए जेट-संचालित हवाई लक्ष्य को नष्ट कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।

ड्रोन की अधिकतम गति लगभग 0.9 मैक बताई जाती है। यह लगभग 8.5 टन अधिकतम वजन के साथ उड़ान भर सकता है और करीब 1.5 टन तक हथियार एवं पेलोड ले जाने में सक्षम है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान यदि इस ड्रोन को अपनी वायुसेना में शामिल करता है, तो उसकी निगरानी, हमला और हवाई युद्ध क्षमता में बड़ा इजाफा हो सकता है।

@MUSKAN KUMARI

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