इस्रायल को आशंका है कि ईरान उस पर और खाड़ी देशों पर अचानक मिसाइल और ड्रोन हमला कर सकता है। यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस्रायली खुफिया एजेंसियों ने संभावित खतरे को लेकर सरकार को अलर्ट किया है।
बताया जा रहा है कि इस खतरे को देखते हुए इस्रायल काट्ज और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सुरक्षा हालात की समीक्षा की है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह विफल होने से पहले ईरान हमला करने की कोशिश कर सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक संभावित हमले की तुलना ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ जैसे सैन्य अभियानों के शुरुआती चरणों से की जा रही है। हालांकि इन आशंकाओं को लेकर आधिकारिक पुष्टि सीमित है, लेकिन इस्रायली सेना हाई अलर्ट पर है।
इधर Donald Trump और Benjamin Netanyahu के बीच ईरान को लेकर रणनीतिक मतभेदों की खबरें भी सामने आई हैं। इसके बावजूद दोनों देशों की सेनाएं मिलकर संभावित खतरे से निपटने की तैयारी कर रही हैं।
Israel Defense Forces और इस्रायली वायुसेना लगातार अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के संपर्क में हैं। दोनों देशों के बीच खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है ताकि ईरान की संदिग्ध सैन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल ईयाल जमीर अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए हैं।
पिछले एक महीने में अमेरिका से इस्रायल पहुंचने वाले सैन्य उपकरणों और रक्षा प्रणालियों की सप्लाई में भी तेजी आई है। दोनों देशों ने मिलकर मिसाइल डिफेंस सिस्टम, तकनीक और सॉफ्टवेयर को और मजबूत किया है ताकि संभावित हमलों को हवा में ही रोका जा सके।
इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर साफ किया है कि वे ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के संवर्धित यूरेनियम को अपने नियंत्रण में लेकर उसे नष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के पास बड़ी मात्रा में अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जिसे लेकर पश्चिमी देशों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
इस्रायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है और उसे अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानता है। ऐसे में मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
@MUSKAN KUMARI
