ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता को लेकर सोमवार को ईरान ने बड़ा बयान दिया। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन किसी अंतिम समझौते को लेकर अभी कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बघाई ने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि समझौता जल्द होने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका का राजनीतिक व्यवहार लगातार असंगत और विरोधाभासी रहा है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया जटिल बन रही है।
ईरान की अर्ध-सरकारी तसनीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक बघाई ने कहा कि वाशिंगटन के भीतर कुछ ही घंटों में बदलते रुख और विरोधाभासी बयान वार्ता को प्रभावित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की निर्णय लेने की प्रक्रिया व्यवस्थित नहीं है और वहां आंतरिक स्तर पर कई तरह के मतभेद मौजूद हैं।
ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिका में हो रहे इस्तीफों, संसद में विरोध, जनमत और राजनीतिक असहमति का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों का फायदा कुछ बाहरी ताकतें, खासकर इस्राइली पक्ष, उठाने की कोशिश कर रही हैं।
बघाई ने स्पष्ट किया कि बातचीत के लिए कोई अंतिम समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि ईरान का मुख्य उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों और अधिकारों की रक्षा करना है और अंतिम नतीजे की घोषणा तभी की जाएगी जब समझौता पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।
साठ दिनों के प्रस्तावित रोडमैप को लेकर उन्होंने कहा कि इस दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा की योजना है, जिनमें परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विषय भी शामिल हैं। हालांकि, फिलहाल ईरान परमाणु मामलों के तकनीकी विवरणों पर चर्चा नहीं कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी रविवार को ईरान के साथ जारी कूटनीतिक प्रयासों में प्रगति का दावा किया। नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रुबियो ने कहा कि आने वाले घंटों में कुछ सकारात्मक खबर सामने आ सकती है।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है और कई मुद्दों पर काम बाकी है। रुबियो ने दोहराया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला और शुल्क मुक्त बनाए रखने की योजना पर काम कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए ईरान की सहमति आवश्यक होगी।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह वार्ता पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच संभावित समझौते पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
@MUSKAN KUMARI
