वॉशिंगटन। अमेरिका यूरोप में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के अभियानों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले विमानों और युद्धपोतों की संख्या में बड़ी कटौती करने की योजना बना रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों का असर नाटो के अभियानों में इस्तेमाल होने वाले कई अहम सैन्य संसाधनों पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित कटौती के तहत एफ-16 और एफ-15ई लड़ाकू विमानों की संख्या लगभग 150 से घटाकर 100 की जा सकती है। वहीं समुद्री निगरानी विमानों की संख्या 26 से घटाकर 15 करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा यूरोप के लिए उपलब्ध सभी आठ हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों को भी हटाने की योजना है।
प्रस्तावित बदलावों में एक मिसाइल-सक्षम पनडुब्बी और एक विमानवाहक पोत को दूसरी जगह तैनात करना भी शामिल है। इसके साथ ही कई युद्धपोतों और विमानवाहक पोत मिशनों से जुड़े दर्जनों विमानों को भी हटाया जा सकता है। यूरोप में तैनात दो बमवर्षक समूहों में से एक को भी स्थानांतरित किए जाने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से नाटो की लंबी दूरी तक हमला करने और निगरानी करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे रूसी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नजर रखने और लंबी दूरी की मिसाइल हमलों की क्षमता भी सीमित हो सकती है।
हालांकि पेंटागन ने अभी तक इस कटौती की समय-सीमा को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। उसने केवल इतना कहा है कि अमेरिका यूरोप में अपनी सैन्य प्रतिबद्धताओं को नई रणनीति के अनुरूप समायोजित कर रहा है।
अमेरिकी यूरोपीय कमान के अनुसार, यह कदम 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति और ‘नाटो 3.0’ की अवधारणा के तहत जिम्मेदारियों के व्यापक बंटवारे की नीति का हिस्सा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यूरोपीय देशों और कनाडा को महाद्वीप की पारंपरिक सुरक्षा की अधिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
अमेरिकी यूरोपीय कमान के प्रमुख जनरल एलेक्सस जी. ग्रिनकेविच ने कहा कि नाटो फोर्स मॉडल में अमेरिकी सैन्य बलों पर अत्यधिक निर्भरता रही है और प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य रक्षा व्यवस्था को अधिक यथार्थवादी और संतुलित बनाना है।
@MUSKAN KUMARI
