तेहरान। ईरान इस समय अपने पिछले 80 वर्षों के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है और खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल के कारण आम नागरिकों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है। सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 21 अप्रैल से 20 मई के बीच वार्षिक महंगाई दर 77.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि प्वाइंट-टू-प्वाइंट महंगाई 113 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह स्थिति दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे गंभीर मानी जा रही है।
एक साल के भीतर चावल, खाद्य तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-इस्राइल संघर्ष, होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकेबंदी, आयात पर बढ़ी लागत, सरकारी सब्सिडी में कटौती और लंबे समय से चली आ रही आर्थिक नीतियां इस संकट के प्रमुख कारण हैं।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि बाजारों में ग्राहक तो पहुंच रहे हैं, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं। व्यापारियों के मुताबिक, पिछले चार दशकों में उन्होंने इतनी गंभीर मंदी नहीं देखी।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौजूदा संकट अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि दशकों की संरचनात्मक कमजोरियों और तेल आधारित अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता का नतीजा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
@MUSKAN KUMARI
