Home » Latest News » भारत के सामने उभर रहा आतंकवाद का नया खतरा, ‘हाइब्रिड मॉड्यूल’ बने सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी चुनौती

भारत के सामने उभर रहा आतंकवाद का नया खतरा, ‘हाइब्रिड मॉड्यूल’ बने सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी चुनौती

नई दिल्ली। भारत की सुरक्षा एजेंसियों के सामने आतंकवाद का एक नया और जटिल स्वरूप उभरकर सामने आ रहा है। सुरक्षा विश्लेषकों और अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में जिन आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ है, उनका प्रत्यक्ष संबंध लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अल-कायदा या इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसे प्रतिबंधित संगठनों से नहीं मिला है। हालांकि जांच में यह संकेत मिले हैं कि ये मॉड्यूल इन संगठनों की विचारधारा या नेटवर्क से किसी न किसी रूप में प्रभावित रहे हैं।

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह रणनीति पाकिस्तान की एक नई कार्यप्रणाली का हिस्सा हो सकती है। इसके तहत ऐसे मॉड्यूल तैयार किए जाते हैं जिनमें किसी बड़े आतंकी संगठन की सीधी भूमिका दिखाई नहीं देती, जिससे अंतरराष्ट्रीय निगरानी और जवाबदेही से बचा जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अल-कायदा और आईएस जैसे संगठन पहले से ही कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा प्रतिबंधित घोषित किए जा चुके हैं। ऐसे संगठनों की गतिविधियों, फंडिंग और नेटवर्क की निगरानी अपेक्षाकृत आसान होती है। इसी वजह से अब अप्रत्यक्ष और विकेंद्रीकृत मॉड्यूलों के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि ऐसे मॉड्यूल किसी एक संगठन की विचारधारा तक सीमित नहीं होते। कई बार वे विभिन्न आतंकी संगठनों की रणनीतियों और प्रचार सामग्री से प्रभावित होकर काम करते हैं। इससे उनकी पहचान और गतिविधियों का पता लगाना अधिक कठिन हो जाता है।

अधिकारियों के अनुसार, कट्टरपंथी प्रचार सामग्री, ऑनलाइन नेटवर्क और स्थानीय संपर्कों के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिशें भी चिंता का विषय हैं। ऐसे मॉड्यूलों में प्रत्यक्ष विदेशी संबंधों के कम दिखाई देने के कारण जांच एजेंसियों को शुरुआती सुराग जुटाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी आतंकी घटना की जिम्मेदारी कोई स्थापित संगठन लेता है, तो जांच एजेंसियों के पास उसके नेटवर्क, कार्यशैली और फंडिंग पैटर्न के आधार पर जांच आगे बढ़ाने का आधार होता है। लेकिन नए प्रकार के मॉड्यूलों में यह स्पष्टता नहीं होती, जिससे जांच अधिक जटिल हो जाती है।

सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे उभरते खतरों पर नजर बनाए हुए हैं और उनका मानना है कि भविष्य में आतंकवाद के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए पारंपरिक जांच पद्धतियों के साथ-साथ तकनीकी और खुफिया क्षमताओं को भी और मजबूत करने की आवश्यकता होगी।

@MUSKAN KUMARI

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Space

How to Bring Unique Traffic to a News Portal
Archives

Recent Posts