नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के छह वर्ष पूरे होने पर इसकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि इस योजना ने लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना गारंटी ऋण, वित्तीय समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर प्रदान किए हैं। उन्होंने इसे विश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता पर आधारित एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
कोविड-19 महामारी के दौरान जून 2020 में शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना को केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए 7,332 करोड़ रुपये का बढ़ा हुआ बजटीय प्रावधान किया गया है। साथ ही ऋण सीमा में भी वृद्धि की गई है, ताकि अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को लाभ मिल सके।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह योजना केवल ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने लाखों छोटे कारोबारियों के जीवन में आत्मविश्वास, गरिमा और नए अवसरों का संचार किया है। उन्होंने सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका परिश्रम और उद्यमशीलता भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक 75 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 112 लाख से अधिक ऋण वितरित किए जा चुके हैं। इन ऋणों की कुल राशि 17,800 करोड़ रुपये से अधिक है। इससे छोटे व्यापारियों को अपना कारोबार फिर से शुरू करने, आवश्यक सामान खरीदने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने में सहायता मिली है।
योजना के तहत ब्याज सब्सिडी और कैशबैक प्रोत्साहन के रूप में करीब 800 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। इससे डिजिटल भुगतान और समय पर ऋण चुकाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला है।
सरकार के अनुसार, लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थियों ने पहली बार औपचारिक संस्थागत ऋण प्रणाली तक पहुंच बनाई है, जबकि करीब 30 प्रतिशत लाभार्थियों ने आगे अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्राप्त की। योजना के कारण लाभार्थियों की वार्षिक आय में औसतन 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में भी योजना का व्यापक प्रभाव देखने को मिला है। रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं ने अब तक 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 9 लाख करोड़ रुपये बताया गया है।
इसके अलावा, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा लगभग 6 लाख स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रशिक्षण दिया गया है। योजना के लगभग 53 लाख लाभार्थी वित्तीय समावेशन और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या वंचित और कमजोर वर्गों की है।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी इस योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना के कुल लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं, जिन्हें आर्थिक स्थिरता, आत्मनिर्भरता और रोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।
केंद्र सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना को आत्मनिर्भर भारत अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा है कि यह योजना छोटे व्यापारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है।
@MUSKAN KUMARI
