अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं के वीजा नियमों को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने ट्रंप प्रशासन से मौजूदा वीजा ढांचे को बनाए रखने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि प्रस्तावित प्रतिबंध अमेरिका की तकनीकी बढ़त, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और रिसर्च नेतृत्व को कमजोर कर सकते हैं।
होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी और ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट को भेजे गए एक संयुक्त पत्र में कांग्रेस के चार सदस्यों — सैम लिकार्डो, जे ओबरनोल्टे, मारिया सालाजार और राजा कृष्णमूर्ति — ने एफ-1 और जे-1 वीजा धारकों के लिए मौजूदा “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” सिस्टम को खत्म कर तय चार साल की अवधि लागू करने के प्रस्ताव का विरोध किया।
सांसदों ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था लंबी अवधि की पढ़ाई, रिसर्च और वर्कफोर्स डेवलपमेंट के लिए जरूरी लचीलापन देती है, खासकर विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) जैसे क्षेत्रों में, जहां डॉक्टरेट की पढ़ाई अक्सर छह साल या उससे ज्यादा समय तक चलती है।
पत्र में सांसदों ने लिखा कि अंतरराष्ट्रीय छात्र एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, मेडिकल रिसर्च और उभरती टेक्नोलॉजी में अमेरिका की प्रतिस्पर्धा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन छात्रों को अमेरिका से बाहर किया गया, तो वे अपने देशों में लौटकर विदेशी कंपनियों, खासकर चीन की टेक कंपनियों को मजबूत कर सकते हैं।
सांसदों ने यह भी कहा कि चार साल की तय सीमा लागू होने से छात्रों को बार-बार वीजा बढ़ाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, जिससे प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा, प्रोसेसिंग में देरी होगी और पढ़ाई व रिसर्च की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।
पत्र में आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय छात्र हर साल अमेरिकी अर्थव्यवस्था में करीब 43 बिलियन डॉलर का योगदान देते हैं और 3.55 लाख से ज्यादा नौकरियों को समर्थन प्रदान करते हैं।
सांसदों ने चेतावनी दी कि अगर विदेशी STEM ग्रेजुएट्स की संख्या में एक-तिहाई तक गिरावट आती है, तो अमेरिका अपने उच्च-कुशल STEM वर्कफोर्स का 6 से 11 प्रतिशत हिस्सा खो सकता है। इससे अगले दशक में अमेरिकी जीडीपी को हर साल 240 से 481 बिलियन डॉलर तक का नुकसान होने की आशंका जताई गई है।
@MUSKAN KUMARI
