Marco Rubio ने शुक्रवार को कहा कि संघर्ष रोकने को लेकर ईरान के साथ जारी बातचीत में कुछ मामूली प्रगति हुई है। हालांकि उन्होंने साथ ही NATO सहयोगियों के रवैये पर नाराजगी भी जताई।
स्वीडन में NATO सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए रुबियो ने कहा कि वार्ता में “थोड़ी हलचल” जरूर हुई है, लेकिन इसे बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बातचीत आगे बढ़ी है और यह सकारात्मक संकेत है।
हेलसिंगबर्ग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रुबियो ने दोहराया कि अमेरिका की रणनीतिक मांगें अब भी स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोके और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही बनी रहे।
रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान ओमान को साथ लेकर ऐसी व्यवस्था बनाना चाहता है, जिसके तहत बंद जलमार्गों से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाया जाए। इस प्रस्तावित समुद्री शुल्क व्यवस्था की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी देश को ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं करनी चाहिए।
इस दौरान रुबियो ने Donald Trump की NATO सहयोगियों को लेकर नाराजगी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य अभियानों को लेकर कुछ पश्चिमी सहयोगियों का अलग रुख तनाव पैदा कर रहा है।
रुबियो के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप इस बात से निराश हैं कि कुछ NATO सहयोगी अमेरिका की नीतियों और पश्चिम एशिया में की जा रही कार्रवाई का खुलकर समर्थन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का समाधान जरूरी है, हालांकि यह तुरंत संभव नहीं दिखता।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम, समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच रणनीतिक मतभेद आने वाले समय में वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
@MUSKAN KUMARI
