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विकसित भारत 2047 के रोडमैप पर नीति आयोग की अहम बैठक, रोजगार, कौशल विकास और ऊर्जा सुरक्षा पर हुआ मंथन

नई दिल्ली। देश को वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के संकल्प के साथ राष्ट्रपति भवन में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में देश के सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और प्रशासकों ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रमुख मुद्दों और फैसलों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे शुरू हुई यह बैठक शाम साढ़े छह बजे तक चली, जिसमें समावेशी मानव विकास और देश की आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

रोजगार और कौशल विकास पर विशेष जोर

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने रोजगार के मुद्दे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल विकास की आवश्यकता सबसे अधिक है।

उन्होंने कहा कि उद्योग जगत की ओर से अक्सर यह शिकायत की जाती है कि बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। बदलती तकनीक के दौर में 1990 और 2000 के दशक की पुरानी व्यवस्थाओं पर निर्भर नहीं रहा जा सकता।

उपाध्यक्ष के अनुसार, आईटीआई और इंजीनियरिंग कॉलेजों जैसे तकनीकी संस्थानों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढालना होगा, ताकि युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

मानव विकास रहा बैठक का मुख्य एजेंडा

इस बार की गवर्निंग काउंसिल बैठक का मुख्य विषय ‘विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ रहा। अशोक कुमार लाहिड़ी ने बताया कि बैठक में बचपन से लेकर वृद्धावस्था तक मानव जीवन के विभिन्न चरणों, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुजुर्गों के कल्याण जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।

जापान की तरक्की का दिया उदाहरण

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने जापान के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि मेइजी पुनर्स्थापना (Meiji Restoration) के दौरान जापान की प्रगति तब शुरू हुई थी, जब वहां साक्षरता दर 40 प्रतिशत तक पहुंची थी। उन्होंने कहा कि भारत में वर्तमान साक्षरता दर 70 प्रतिशत से अधिक है और एक शिक्षित, स्वस्थ तथा सशक्त आबादी ही देश की प्रगति की सबसे बड़ी ताकत है।

बैठक में सभी राज्यों ने अपनी-अपनी विकास योजनाओं और अनुभवों को साझा किया।

पश्चिम बंगाल और ऊर्जा सुरक्षा पर भी हुई चर्चा

पश्चिम बंगाल से जुड़े सवाल पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वहां के ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए सहायता की बात उठाई थी, हालांकि इस विषय पर कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं सात मई तक पश्चिम बंगाल से विधायक रहे हैं।

सौर ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा पर जोर

बैठक में बिजली की कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी लंबा मंथन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने घरों, स्कूलों और अस्पतालों की छतों पर सोलर पैनल लगाने पर जोर दिया, ताकि बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम हो और सब्सिडी का बोझ घटाया जा सके।

इसके अलावा कई सदस्यों ने कहा कि तकनीकी प्रगति के कारण आज परमाणु ऊर्जा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित है और चेरनोबिल जैसी दुर्घटनाओं की आशंका को लेकर अनावश्यक भय की जरूरत नहीं है।

बैठक में विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मानव संसाधन विकास, कौशल उन्नयन और ऊर्जा सुरक्षा को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया।

@MUSKAN KUMARI

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