बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर में 30 जुलाई को होने वाला उपचुनाव अब भाजपा, जन सुराज और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। भाजपा अपने तीन दशक पुराने गढ़ को बचाने की चुनौती का सामना कर रही है, वहीं जन सुराज अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। दूसरी ओर, RLJP भी इस सीट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने और चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने के लिए पूरी ताकत से प्रचार अभियान चला रही है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट खाली हुई है। नितिन नवीन लगातार पांच बार बांकीपुर से विधायक चुने गए और 1995 से यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ रही है।
जन सुराज के लिए चुनावी इतिहास चुनौतीपूर्ण रहा है। वर्ष 2020 में पुष्पम प्रिया चौधरी को यहां 5,189 वोट मिले थे, जबकि 2025 के विधानसभा चुनाव में जन सुराज की उम्मीदवार वंदना कुमारी को 7,717 वोट हासिल हुए थे। वहीं, RLJP भी इस उपचुनाव में अपनी संगठनात्मक ताकत और जनसंपर्क अभियान के जरिए मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने में जुटी है।

ऐतिहासिक रूप से भी बांकीपुर का विशेष महत्व रहा है। इस सीट ने बिहार को कृष्ण बल्लभ सहाय और महामाया प्रसाद सिन्हा जैसे दो मुख्यमंत्री दिए हैं। अब 30 जुलाई का उपचुनाव यह तय करेगा कि भाजपा अपना मजबूत किला बचा पाती है या विपक्षी दल चुनावी समीकरण बदलने में सफल होते हैं।
@MUSKAN KUMARI
