नई दिल्ली। गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग और उससे जुड़े राजनीतिक व धार्मिक विमर्श के बीच कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मंगलवार को कहा कि कुछ लोग गाय को माता मान सकते हैं, लेकिन मुसलमानों पर इस मान्यता को स्वीकार करने की कोई बाध्यता नहीं है।
दलवई ने कहा कि पहले गाय को राष्ट्रीय पशु कहा जाता था और अब उसे माता कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमान गाय को देश का एक महत्वपूर्ण पशु और राष्ट्रीय पशु मान सकते हैं, लेकिन उसे माता मानना उनके लिए आवश्यक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं अलग हो सकती हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि “गाय हमारी माता है” और उसका संबंध हमारी जन्मदात्री माता जैसा ही है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि इस रिश्ते को किसी प्रमाण या विशेष दर्जे की आवश्यकता नहीं है।
वहीं, बकरीद से पहले कई इस्लामी धर्मगुरुओं ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। अजमेर दरगाह शरीफ, कोलकाता की नखोदा मस्जिद और दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन दरगाह से जुड़े धर्मगुरुओं ने मुस्लिम समुदाय से ईद-उल-अजहा पर गाय की कुर्बानी न देने की अपील की थी।
अजमेर दरगाह से जुड़े सैयद सरवर चिश्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद के माध्यम से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने, उसके वध और मांस निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। वहीं, ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश ने भी गोमांस निर्यात करने वाली कंपनियों पर रोक लगाने और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग दोहराई है।
गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की मांग को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार जारी है।
@MUSKAN KUMARI
