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असम विधानसभा में पेश हुआ यूसीसी बिल 2026, एक से ज्यादा शादी पर रोक; विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य

असम सरकार ने सोमवार को राज्य विधानसभा में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी, असम, 2026)’ विधेयक पेश किया। राज्य के मंत्री अरूप बोरा द्वारा पेश किए गए इस बिल में शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के लिए एक समान नागरिक कानूनी ढांचा लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को उनके संवैधानिक अधिकारों और पारंपरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक संहिता लागू करना है, ताकि सभी समुदायों के लिए लैंगिक न्याय, समानता और कानूनी एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।

एक से ज्यादा शादी पर लगेगी रोक

बिल के तहत एक समय में एक से अधिक विवाह करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता का सम्मान करेगा। इसके तहत लोग अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार विवाह कर सकेंगे। इनमें वैदिक विवाह, अहोम चकलोंग, सप्तपदी, निकाह, पवित्र मिलन और आनंद कारज जैसी परंपराएं शामिल हैं।

विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

यूसीसी बिल के अनुसार राज्य में होने वाले सभी विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा। शादी के बाद दंपति को 60 दिनों के भीतर सब-रजिस्ट्रार के समक्ष विवाह ज्ञापन जमा करना होगा।

तलाक के लिए भी समान कानूनी आधार तय किए गए हैं, जिनमें क्रूरता, परित्याग और आपसी सहमति शामिल हैं। कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कस्टडी सामान्यतः मां के पास रहेगी।

उत्तराधिकार में लैंगिक समानता पर जोर

उत्तराधिकार के मामलों में भी यह कानून एक समान और लैंगिक-समान व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव करता है। यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत के मृत्यु को प्राप्त होता है, तो संपत्ति के बंटवारे में पति-पत्नी, बच्चों और माता-पिता को समान रूप से ‘क्लास-1’ वारिस माना जाएगा।

असम सरकार का कहना है कि यह विधेयक समाज में समान अधिकारों और कानूनी पारदर्शिता को मजबूत करेगा। वहीं, विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से इस बिल को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

@MUSKAN KUMARI

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