काठमांडू। भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह (बालेंद्र शाह) के बयान के बाद देश की संसद में भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों के विरोध के चलते मंगलवार को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस बीच भारत ने भी स्पष्ट कर दिया कि सीमा विवाद के समाधान में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रतिनिधि सभा की कार्यवाही 8 जून तक के लिए स्थगित कर दी गई है, जबकि नेशनल असेंबली की बैठक बुधवार तक टाल दी गई है। इससे पहले सोमवार को भी इसी मुद्दे को लेकर संसद की कार्यवाही बाधित हुई थी।
विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री बालेन शाह के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि “सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारत के क्षेत्रों पर कब्जा किया है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों देशों ने सीमा विवाद के समाधान के लिए इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की मदद लेने पर सहमति जताई है तथा नेपाल ने इस मुद्दे को चीन और ब्रिटेन के समक्ष भी उठाया है।
प्रधानमंत्री के इस बयान का विपक्षी सांसदों ने कड़ा विरोध किया। सांसदों ने मांग की कि प्रधानमंत्री अपना बयान वापस लें और इसे संसद की कार्यवाही से हटाया जाए। विरोध के दौरान कुछ सांसद अध्यक्ष के आसन तक पहुंच गए, जिसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
भारत ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत-नेपाल की लगभग 98 प्रतिशत सीमा का निर्धारण हो चुका है और शेष मुद्दों को दोनों देश आपसी बातचीत के माध्यम से सुलझाने के पक्षधर हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा विवाद में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।
गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। भारत इन क्षेत्रों को उत्तराखंड का हिस्सा मानता है और विवाद के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देता रहा है।
@MUSKAN KUMARI
