अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar के बीच रविवार को नई दिल्ली स्थित Hyderabad House में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया।
बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के अलावा पश्चिम एशिया, यूक्रेन संघर्ष, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया के ताजा घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसे भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग का अहम संकेत माना जा रहा है।
‘रणनीतिक साझेदारी सिर्फ सहयोग नहीं’
संयुक्त प्रेस वार्ता में मार्को रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका केवल साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी हैं। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी का मतलब उन साझा हितों पर साथ मिलकर काम करना है, जो दोनों देशों और वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हों।
रूबियो ने कहा, “दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच यह सहयोग 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका संबंधों को “बहाल” करने की नहीं, बल्कि पहले से मजबूत साझेदारी को और आगे बढ़ाने की जरूरत है।
जयशंकर बोले- राष्ट्रीय हितों पर आधारित है साझेदारी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच राजनीतिक समझ एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी से उत्पन्न हुई है, जो दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री की Narendra Modi से हुई मुलाकात में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया, खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन संघर्ष जैसे विषयों पर भी दोनों देशों के बीच गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
रक्षा, व्यापार और वैश्विक सहयोग पर जोर
दोनों नेताओं ने रक्षा, आर्थिक सहयोग और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता से भविष्य में व्यापार, टेक्नोलॉजी, सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में नए अवसर खुल सकते हैं।
रूबियो ने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के रूप में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए बेहद अहम है। वहीं जयशंकर ने कहा कि जटिल वैश्विक परिस्थितियों में भी दोनों देशों के बीच खुला और सकारात्मक संवाद जारी रहेगा।
लगातार संपर्क में हैं दोनों देश
जयशंकर ने बताया कि यह मार्को रूबियो की भारत यात्रा का पहला अवसर है, लेकिन पदभार संभालने के बाद से ही दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बना हुआ है। उन्होंने वॉशिंगटन, न्यूयॉर्क और फ्रांस में हुई पिछली मुलाकातों का भी उल्लेख किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने और वैश्विक रणनीतिक संतुलन में दोनों देशों की भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
@MUSKAN KUMARI
