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CJI सूर्यकांत बोले- संविधान किसी खास वर्ग की जागीर नहीं, हर नागरिक का समान अधिकार

सूर्यकांत ने कहा है कि भारत का संविधान किसी खास और संपन्न वर्ग का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक का समान अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान केवल उन लोगों के लिए नहीं है जो महंगी कानूनी प्रक्रिया और बड़े वकीलों का खर्च उठा सकते हैं।

चीफ जस्टिस ने यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह की आत्मकथा “The Constitution Is My Home: Conversations on a Life in Law” के विमोचन कार्यक्रम के लिए भेजे गए वीडियो संदेश में की।

उन्होंने कहा कि संविधान वास्तव में “सबका साझा घर” है। यह केवल जजों, वकीलों या सरकारी संस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव, शहर, गरीब और समाज के हाशिये पर खड़े हर व्यक्ति का भी है। उन्होंने कहा कि लोग न्याय और अपने अधिकारों की उम्मीद लेकर संविधान की ओर देखते हैं।

ममता बनर्जी के खिलाफ ED की याचिका पर 18 अगस्त को सुनवाई

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई 18 अगस्त तक के लिए टाल दी है।

आई-पैक रेड मामले में ED ने आरोप लगाया है कि छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जांच में बाधा डाली थी। एजेंसी ने तत्कालीन डीजीपी राजीव कुमार और तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

राष्ट्रपति को विश्वविद्यालय कर्मचारियों पर कार्रवाई का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत ने एक अहम फैसले में कहा कि राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय के ‘विजिटर’ होने के नाते राष्ट्रपति को विश्वविद्यालय कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और सेवा समाप्त करने का अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। मामला विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार जितेंद्र सिंह से जुड़ा था।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने CJI को लिखा खुला पत्र

72 वकीलों, कानून छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समूह ने CJI सूर्यकांत को खुला पत्र लिखकर हालिया पर्यावरण संबंधी टिप्पणियां वापस लेने की मांग की है। पत्र में कहा गया कि विकास परियोजनाओं को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं को संदेह की नजर से देखना उचित नहीं है।

राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी को कोई आपत्ति नहीं है तो अदालतें भारतीय दंड संहिता की धारा 124A यानी राजद्रोह से जुड़े मामलों की सुनवाई जारी रख सकती हैं।

हालांकि कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि 11 मई 2022 के आदेश के तहत केंद्र सरकार की समीक्षा पूरी होने तक राजद्रोह कानून के तहत नए मामले दर्ज करने पर रोक बनी हुई है।

वसीयत का उद्देश्य सामान्य उत्तराधिकार बदलना’

एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वसीयत का मूल उद्देश्य उत्तराधिकार के सामान्य क्रम को बदलना होता है। अदालत ने कहा कि केवल प्राकृतिक वारिसों को संपत्ति से बाहर करना किसी वसीयत को संदिग्ध नहीं बनाता।

कोर्ट ने कर्नाटक के एक संपत्ति विवाद मामले में बहन के पक्ष में की गई वसीयत को वैध माना और पत्नी-बच्चों की अपील खारिज कर दी।

@MUSKAN KUMARI

 

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