लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं, छात्रों के आंदोलन और सरकार की कार्यशैली को लेकर कई सवाल उठाए। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के साथ उनकी तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
अखिलेश यादव ने कहा कि देश में पहली बार ऐसा आंदोलन देखने को मिला, जिसमें छात्रों के साथ उनके माता-पिता भी सड़कों पर उतरे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जो लोग भगवान के दरबार का चढ़ावा नहीं बचा सके, वे पेपर लीक कैसे रोक पाएंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में करीब 20 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और कई मामलों में अदालत के हस्तक्षेप के बाद परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं।

उन्होंने सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार सिर्फ जुमले देती है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि छात्रों और युवाओं के व्यापक आंदोलन के दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा और सरकार को झुकना पड़ा।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए “कॉकरोच जनता पार्टी” का भी उल्लेख किया और किसान आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को चुनाव नजदीक आने पर तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे।
अखिलेश यादव के बयान पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि छात्रों की मांगों के बाद सरकार कानून लेकर आई, जो लोकतंत्र की ताकत का उदाहरण है। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल की आपातकाल (इमरजेंसी) का जिक्र करते हुए कहा कि आंदोलन का जवाब कानून बनाकर देना बेहतर है या इमरजेंसी लगाकर उसे दबाना।
इस पर अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने इमरजेंसी नहीं देखी, लेकिन हाल के वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ जो हुआ, वह भी देश ने देखा है। उन्होंने कहा कि जैसे इमरजेंसी के बाद राजनीतिक परिवर्तन हुआ था, वैसे ही इस बार भी बदलाव देखने को मिलेगा।
@MUSKAN KUMARI
