‘मगधद्वार’ नाम को लेकर बिहार की सियासत में नई बहस
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर इतिहास और पहचान से जुड़ा मुद्दा गर्मा गया है। पटना जिले के बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलकर “मगधद्वार” करने की मांग तेज हो गई है। इस प्रस्ताव ने राजनीतिक गलियारों से लेकर स्थानीय प्रशासन तक हलचल बढ़ा दी है।
मामला तब चर्चा में आया जब भाजपा से जुड़े स्थानीय विधायक अरुण कुमार साह ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बख्तियारपुर का नाम एक ऐसे ऐतिहासिक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसे लोग आक्रांता के रूप में देखते हैं। ऐसे में बिहार की गौरवशाली संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने के लिए इसका नाम बदलकर “मगधद्वार” किया जाना चाहिए।
इस मांग को और बल तब मिला जब बख्तियारपुर नगर परिषद के चेयरमैन पवन कुमार ने भी इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नगर परिषद की बैठक में प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। उनके मुताबिक नया नाम क्षेत्र की सकारात्मक और ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करेगा।
स्थानीय नेताओं और समर्थकों का तर्क है कि “बख्तियारपुर” नाम 12वीं-13वीं सदी के तुर्क सेनापति मुहम्मद बख्तियार खिलजी से जुड़ा माना जाता है, जिस पर नालंदा विश्वविद्यालय को नुकसान पहुंचाने का आरोप इतिहास में दर्ज है। इसी कारण लंबे समय से नाम बदलने की मांग समय-समय पर उठती रही है।

वहीं समर्थकों का कहना है कि “मगधद्वार” नाम बिहार की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा का प्रतीक होगा। उनका दावा है कि मगध साम्राज्य भारत के स्वर्णिम इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और उसी पहचान को दोबारा मजबूत करने की जरूरत है।
इस मुद्दे को लेकर “परिवर्तन संदेश यात्रा” भी शुरू की गई है, जिसके जरिए लोगों के बीच जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यह केवल भावनात्मक मुद्दा है या आने वाले समय में प्रशासनिक बदलाव का रूप ले सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन मांग तेज होने के बाद यह मुद्दा बिहार की राजनीति और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है।
@MUSKAN KUMARI
