होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का असर अब इराक की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। तेल निर्यात पर भारी निर्भरता के चलते इराक में नकदी संकट गहराता जा रहा है और सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में देरी की खबरें सामने आ रही हैं।
मोसुल के 38 वर्षीय शिक्षक महमूद वलीद के मुताबिक, उनकी सैलरी करीब तीन महीने से लगातार देरी से मिल रही है। उनका कहना है कि इससे रोजमर्रा के खर्च और आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। एक डॉक्टर ने भी बताया कि उनकी सैलरी इस महीने 10 दिनों से ज्यादा देर से मिली।

इराक के राष्ट्रीय बजट का करीब 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा तेल निर्यात से आता है। होर्मुज संकट के कारण इराक के तेल निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इराक के तेल निर्यात में करीब 83 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मई तक समुद्र के रास्ते कच्चे तेल का निर्यात करीब 97 प्रतिशत तक गिर गया।
इराक के पास तेल निर्यात के लिए दूसरे देशों की तुलना में सीमित वैकल्पिक रास्ते हैं। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट का सीधा असर उसकी सरकारी आय पर पड़ा है।
वेतन को लेकर बढ़ी चिंता
सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में देरी को लेकर अगस्त की शुरुआत में देश के अलग-अलग हिस्सों में छोटे विरोध प्रदर्शन भी हुए। विश्वविद्यालयों और बिजली मंत्रालय के कर्मचारियों ने भी अपनी चिंताएं जाहिर कीं।
हालांकि, इराकी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को हर 45 दिन में सैलरी मिलने की खबरों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि उसके पास करीब 83 अरब डॉलर का रिजर्व है और अन्य आय के स्रोत भी मौजूद हैं। सरकार के मुताबिक, मौजूदा संसाधनों से अगले 10 से 11 महीनों तक कर्मचारियों को सैलरी दी जा सकती है।
फिलहाल, होर्मुज संकट ने इराक की तेल आधारित अर्थव्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है और सरकारी कर्मचारियों के बीच भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
@MUSKAN KUMARI
